नई दिल्ली। अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहित करने और समाज में जातिगत भेदभाव को कम करने के उद्देश्य से केंद्र तथा विभिन्न राज्य सरकारों की ओर से कई तरह की प्रोत्साहन योजनाएं संचालित की जाती हैं। इन योजनाओं में पात्र दंपतियों को आर्थिक सहायता दी जाती है। योजना और राज्य के अनुसार यह राशि ₹50 हजार से लेकर ₹5 लाख तक हो सकती है।
अगर आपने अंतरजातीय विवाह किया है या ऐसा विवाह करने की योजना बना रहे हैं, तो संबंधित सरकारी योजना की पात्रता और आवेदन की समय-सीमा जरूर जांच लें। कई योजनाओं में विवाह का पंजीकरण और निर्धारित अवधि के भीतर आवेदन करना जरूरी होता है।
केंद्र सरकार की योजना में ₹2.5 लाख तक सहायता
अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा देने के लिए डॉ. अंबेडकर से जुड़ी सामाजिक एकीकरण योजना के तहत पात्र दंपतियों को आर्थिक सहायता दिए जाने का प्रावधान बताया जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पात्रता पूरी करने वाले जोड़े को ₹2.5 लाख तक की सहायता मिल सकती है।
इस योजना का प्रमुख उद्देश्य ऐसे विवाहों को प्रोत्साहित करना है, जिनमें एक जीवनसाथी अनुसूचित जाति से और दूसरा गैर-अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित हो।
कौन हो सकता है पात्र?
योजना के लिए पात्रता शर्तों में सामान्य तौर पर ये बातें शामिल बताई जाती हैं:
दंपति में से एक व्यक्ति अनुसूचित जाति से संबंधित होना चाहिए।
दूसरा जीवनसाथी गैर-अनुसूचित जाति वर्ग से होना चाहिए।
विवाह संबंधित कानून के तहत वैध एवं पंजीकृत होना चाहिए।
कुछ योजनाओं में पहली शादी की शर्त लागू होती है।
निर्धारित समय-सीमा के अंदर आवेदन करना आवश्यक हो सकता है।
ध्यान दें: केंद्र और राज्य की योजनाओं की पात्रता अलग-अलग हो सकती है। इसलिए आवेदन से पहले संबंधित विभाग की नवीनतम गाइडलाइन देखना जरूरी है।
अलग-अलग राज्यों में कितनी मिल सकती है सहायता?
अंतरजातीय विवाह के लिए राज्यों ने अपनी-अपनी प्रोत्साहन योजनाएं भी शुरू की हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कुछ राज्यों में मिलने वाली सहायता इस प्रकार बताई जाती है:
राजस्थान: डॉ. सविता बेन अंबेडकर योजना के तहत ₹5 लाख तक सहायता।
कर्नाटक: पात्रता के अनुसार ₹2.5 लाख या ₹3 लाख तक प्रोत्साहन।
मध्य प्रदेश: अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना के तहत ₹2 लाख तक सहायता।
ओडिशा: सुमंगला योजना के तहत ₹2.5 लाख तक प्रोत्साहन।
दिल्ली और महाराष्ट्र: कुछ योजनाओं में ₹50 हजार तक की सहायता।
तमिलनाडु: डॉ. मुथुलक्ष्मी रेड्डी योजना के तहत नकद सहायता के साथ सोने का सिक्का दिए जाने का प्रावधान बताया जाता है।
जरूरी बात: योजनाओं की राशि, पात्रता और नियम समय-समय पर बदल सकते हैं। इसलिए ऊपर दी गई राशि को आवेदन से पहले संबंधित राज्य के आधिकारिक पोर्टल से सत्यापित करें।
आवेदन के लिए किन दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है?
अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना के लिए आवेदन करते समय आमतौर पर निम्न दस्तावेज मांगे जा सकते हैं:
- विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र
- आधार कार्ड
- जन्मतिथि/आयु प्रमाण पत्र
- जाति प्रमाण पत्र
- निवास प्रमाण पत्र
- दंपति की संयुक्त फोटो
- संयुक्त बैंक खाते की पासबुक
- निर्धारित आवेदन फॉर्म
- अन्य दस्तावेज, यदि संबंधित विभाग द्वारा मांगे जाएं।
जाति प्रमाण पत्र के लिए संबंधित राज्य के नियमों के अनुसार सक्षम अधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र आवश्यक हो सकता है।
आवेदन कैसे करें?
अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना के लिए आवेदन की प्रक्रिया राज्य के अनुसार अलग हो सकती है। कई जगहों पर सामाजिक कल्याण विभाग के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन की सुविधा उपलब्ध होती है।
ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध नहीं होने पर आवेदक SDM कार्यालय, तहसील कार्यालय या जिला समाज कल्याण विभाग से संपर्क कर आवेदन प्रक्रिया की जानकारी ले सकते हैं।
आवेदन जमा करने के बाद विभाग द्वारा दस्तावेजों और पात्रता की जांच की जाती है। सत्यापन पूरा होने पर पात्र लाभार्थी के बैंक खाते में निर्धारित सहायता राशि भेजी जा सकती है।
आवेदन करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
अंतरजातीय विवाह योजना में आवेदन करने से पहले यह जरूर जांच लें कि:
आपकी शादी संबंधित योजना की परिभाषा के अनुसार अंतरजातीय विवाह में आती है या नहीं।
दोनों पति-पत्नी की पात्रता पूरी हो रही है या नहीं।
विवाह का पंजीकरण हो चुका है या नहीं।
आवेदन की समय-सीमा समाप्त तो नहीं हुई।
बैंक खाता और दस्तावेज सही हैं या नहीं।
आपके राज्य में योजना की वर्तमान राशि कितनी है।
निष्कर्ष
अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर विभिन्न योजनाएं संचालित की जाती हैं। पात्रता पूरी करने वाले दंपतियों को योजना के नियमों के अनुसार आर्थिक सहायता मिल सकती है। हालांकि, ₹5 लाख की राशि हर दंपति को नहीं मिलती—यह राज्य, योजना और पात्रता पर निर्भर करती है।

