इस खबर का असर शेयर बाजार में भी देखने को मिला। प्रस्ताव सामने आने के बाद Bajaj Finance के शेयर में तेज गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान कंपनी के शेयर करीब 5.84 फीसदी तक टूटकर लगभग 1,078 रुपये के स्तर पर आ गए। इसी तरह L&T Finance के शेयर में भी करीब 2.73 फीसदी की कमजोरी देखने को मिली।
आखिर RBI के प्रस्ताव में क्या है?
RBI का प्रस्ताव मुख्य रूप से ऐसे क्रेडिट प्रोडक्ट्स से जुड़ा है, जिनमें ग्राहक को एक निश्चित क्रेडिट लिमिट उपलब्ध कराई जाती है और वह जरूरत के अनुसार उस लिमिट से रकम निकालकर दोबारा चुका सकता है। भुगतान के बाद उपलब्ध लिमिट फिर से इस्तेमाल की जा सकती है।
इसे आसान भाषा में समझें तो ग्राहक को एक ऐसी क्रेडिट सुविधा मिलती है जिसे वह बार-बार इस्तेमाल कर सकता है। इसी तरह की व्यवस्था कई क्रेडिट लाइन और फ्लेक्सी लोन प्रोडक्ट्स में देखने को मिलती है।
प्रस्ताव का उद्देश्य ऐसी लगातार उपलब्ध रहने वाली क्रेडिट सुविधा से जुड़े जोखिम को सीमित करना है।
NBFCs के लिए टर्म लोन का रास्ता रहेगा खुला
प्रस्तावित व्यवस्था में NBFCs को निर्धारित अवधि और तय भुगतान कार्यक्रम वाले टर्म लोन देने की अनुमति रहेगी। ऐसे लोन में ग्राहक को एक निश्चित राशि स्वीकृत होती है और उसे तय EMI या निर्धारित भुगतान कार्यक्रम के अनुसार वापस करना होता है।
इस तरह के लोन में स्वीकृत रकम को बार-बार इस्तेमाल करने वाली सुविधा सामान्यतः नहीं होती। यानी एक लोन पूरा होने के बाद जरूरत पड़ने पर ग्राहक को नया लोन लेना पड़ सकता है।
किन कंपनियों पर असर पड़ सकता है?
यदि प्रस्तावित नियम लागू होते हैं तो उन NBFCs और डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म्स को अपने मौजूदा प्रोडक्ट्स में बदलाव करना पड़ सकता है, जो ग्राहकों को Flexi Loan, Credit Line या इसी प्रकार की रिवॉल्विंग क्रेडिट सुविधा उपलब्ध कराते हैं।
ऐसे प्रोडक्ट्स में बदलाव का सीधा असर कंपनियों के कारोबार के तरीके पर पड़ सकता है। ग्राहकों को भी भविष्य में बार-बार इस्तेमाल होने वाली क्रेडिट लिमिट के बजाय निर्धारित अवधि वाले लोन विकल्पों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।
हालांकि, जिन NBFCs को RBI की ओर से बाकायदा क्रेडिट कार्ड जारी करने की अनुमति मिली हुई है, प्रस्ताव में उनके लिए अलग प्रावधान होने की बात कही गई है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि सभी NBFCs के क्रेडिट कार्ड कारोबार पर एक साथ रोक लग जाएगी।
ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा?
नए प्रस्ताव का असर सबसे ज्यादा उन ग्राहकों पर पड़ सकता है जो अपनी जरूरत के अनुसार उपलब्ध क्रेडिट लिमिट से रकम निकालते हैं और भुगतान करने के बाद उसी लिमिट का दोबारा इस्तेमाल करते हैं।
भविष्य में ऐसी सुविधा सीमित होने पर ग्राहकों को जरूरत के समय अलग से टर्म लोन लेना पड़ सकता है। वहीं क्रेडिट कार्ड की जरूरत वाले ग्राहकों के लिए बैंक या RBI से अधिकृत क्रेडिट कार्ड जारी करने वाली NBFCs विकल्प बनी रहेंगी।
RBI क्यों सख्त करना चाहता है नियम?
रिटेल लोन और डिजिटल क्रेडिट के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच RBI का मुख्य फोकस ग्राहकों की कर्ज लेने की क्षमता और वित्तीय जोखिम को संतुलित रखना है।
रिवॉल्विंग क्रेडिट की सुविधा में ग्राहक को लगातार उपलब्ध क्रेडिट मिल सकता है। यदि इसका इस्तेमाल बिना पर्याप्त वित्तीय योजना के किया जाए तो व्यक्ति पर कर्ज का बोझ बढ़ने की संभावना रहती है।
RBI के प्रस्ताव का व्यापक उद्देश्य क्रेडिट व्यवस्था में जोखिम को नियंत्रित करना, उधारी को अधिक व्यवस्थित बनाना और वित्तीय प्रणाली की मजबूती बनाए रखना है।
क्या इससे क्रेडिट कार्ड पूरी तरह बंद हो जाएंगे?
नहीं। इस प्रस्ताव का मतलब यह नहीं है कि भारत में क्रेडिट कार्ड व्यवस्था खत्म होने जा रही है। जिन संस्थानों को RBI से क्रेडिट कार्ड जारी करने की अनुमति प्राप्त है, उनके लिए नियम अलग हो सकते हैं।
असल बदलाव उन NBFCs के रिवॉल्विंग या फ्लेक्सी क्रेडिट मॉडल पर पड़ सकता है, जिन्हें क्रेडिट कार्ड जारी करने की अनुमति नहीं मिली है।
निवेशकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह खबर?
NBFCs की कमाई का एक बड़ा हिस्सा विभिन्न प्रकार के कर्ज और वित्तीय सेवाओं से जुड़ा होता है। इसलिए यदि किसी प्रमुख लोन प्रोडक्ट के नियम बदलते हैं, तो कंपनियों को अपने बिजनेस मॉडल, ब्याज आय और ग्राहक पेशकश में बदलाव करना पड़ सकता है।
इसी वजह से RBI के प्रस्ताव के बाद NBFC सेक्टर की कुछ कंपनियों के शेयरों में दबाव देखने को मिला। हालांकि, किसी शेयर की कीमत पर लंबे समय का असर केवल इस एक प्रस्ताव से तय नहीं होता। निवेशकों को कंपनी की कमाई, लोन बुक, जोखिम, प्रबंधन और अंतिम नियमों को भी ध्यान में रखना चाहिए।
महत्वपूर्ण: यह RBI का प्रस्ताव है; इसे अंतिम लागू नियम मानना उचित नहीं होगा। अंतिम दिशा-निर्देश आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि किन संस्थाओं और किन प्रोडक्ट्स पर वास्तव में कितना असर पड़ेगा।

